निर्गमन 12 पुराना नियम

फसह की रात: लहू का चिन्ह

रामसेस शहर की गलियों में एक अजीब सी सन्नाटा छाया हुआ था। हवा तीखी और ठंडी थी, जैसे खुद...

निर्गमन 12 - फसह की रात: लहू का चिन्ह

रामसेस शहर की गलियों में एक अजीब सी सन्नाटा छाया हुआ था। हवा तीखी और ठंडी थी, जैसे खुद प्रकृति ही कुछ अनहोनी का इंतज़ार कर रही हो। एलियासर, जो गोशन इलाके की एक मिट्टी की झोंपड़ी के दरवाजे पर खड़ा था, अपने बेटे की पीठ पर हाथ फेरते हुए, आकाश की ओर देख रहा था। बादल घने थे, चाँदनी टूट-टूट कर आ रही थी, और एक भारीपन, सिर्फ हवा में नहीं, बल्कि हर इस्राएली के दिल में भी, छाया हुआ था।

कई दिनों से बात चल रही थी। मूसा और हारून ने फिरौन के सामने जो चेतावनी रखी थी, वह सभी जानते थे। परमेश्वर की मार का अंतिम दंड आने वाला था। और उसके साथ ही, एक आज्ञा, एक विचित्र और सख्त आज्ञा। एलियासर ने अपने परिवार को इकट्ठा किया—उसकी पत्नी रिव्का, बेटे दान और याकूब, और बहू एस्तेर। उसकी आवाज़ गंभीर थी, लेकिन एक अजीब सी शांति से भरी हुई।

"आज रात," उसने कहा, "सभी को घर के भीतर रहना है। बाहर एक कदम भी नहीं। परमेश्वर ने मूसा के माध्यम से जो निर्देश दिए हैं, उनका पालन शब्दशः करना होगा। यह हमारे जीवन-मरण का प्रश्न है।"

उसने युवा दान को एक स्वस्थ, निर्दोष एक साल के मेमने की तलाश के लिए भेजा। उसे कोई दोष नहीं होना चाहिए था, कोई खरोंच तक नहीं। दान जब मेमना लेकर लौटा, तो उसकी आँखों में एक मासूम सी जिज्ञासा थी। चार दिनों तक, उस छोटे से जानवर ने घर में पड़ाव डाला, लगभग परिवार का सदस्य बन गया। बच्चे उससे लगाव रखने लगे, जिसे देखकर एलियासर का दिल भर आता, पर एक डर भी सता रहा था। आज्ञा स्पष्ट थी।

चौदहवें दिन की संध्या को, जब सूरज डूब रहा था और छायाएँ लंबी हो रही थीं, एलियासर ने एक तेज चाकू निकाला। उसके हाथ काँप नहीं रहे थे, लेकिन उसकी आँखों में एक गहरा दुख था। मेमना शांत था, जैसे वह भी अपनी नियति जानता हो। एक तेज़, दयालु वार के साथ, काम हो गया। रिव्का ने एक कटोरा थाम रखा था। लहू, गरम और गहरे लाल रंग का, उस कटोरे में भर गया। यह कोई साधारण बलिदान नहीं था; यह एक चिह्न था, एक संकेत।

"जल्दी करो," एलियासर ने कहा, और दान ने हिस्सोप की एक गुच्छी ली, उसे लहू में डुबोया, और घर के दरवाजे के दोनों खंभों और ऊपर की चौखट पर जोर-जोर से लहू लगाने लगा। लाल धारियाँ लकड़ी पर चमक रही थीं, एक भयानक और पवित्र निशानी। अंदर, एस्तेर ने आग जलाई थी। मेमने का मांस भूनने की तीखी, भोजन जैसी गंध हवा में फैल गई, लेकिन आज रात यह भोजन नहीं था। यह एक अनुष्ठान था।

"कड़वी जड़ी-बूटियाँ साथ में खानी हैं," रिव्का ने याद दिलाया, उसकी आवाज़ थोड़ी काँप रही थी। "हमारी पीड़ा की याद दिलाने के लिए। और बिना खमीर की रोटी। क्योंकि फिरौन के पास हमें भागने का समय नहीं होगा, रुकने का तो बिल्कुल नहीं।"

वे सब तैयार बैठे थे—कमर बंधी हुई, पैरों में जूते, हाथ में लाठियाँ। भोजन जल्दी-जल्दी किया जाना था, एक यात्रा के लिए तैयार खड़े रहकर। एलियासर ने बच्चों को समझाया, "यह लहू... यह हमारे लिए एक चिन्ह है। जब परमेश्वर की मार इस नगर से गुज़रेगी, तो जिस घर के दरवाजे पर यह लहू लगा होगा, वहाँ वह टल जाएगी। यह हमारा बचाव है।"

रात गहराती गई। बाहर से कभी-कभी दूर से चीखों की आवाज़ आती, फिर सन्नाटा। हवा में एक कराहट सी थी। अंदर, चिराग की लौ टिमटिमा रही थी, और हर कोई साँस रोके सुन रहा था। तभी, आधी रात के करीब, एक ऐसी आवाज़ आई जिसका वर्णन करना कठिन था। कोई चीख नहीं, बल्कि एक गहरी, दर्द से भरी कराह, जो पूरे मिस्र देश को चीरती हुई लग रही थी। यह हर घर से निकल रही थी—एक सामूहिक विलाप, जिसमें राजमहल का शोक भी शामिल था।

एलियासर ने अपने परिवार को और पास खींच लिया। उनकी आँखों में डर था, लेकिन उस डर के पार, एक अटूट विश्वास की चिंगारी भी। बाहर, रामसेस शहर में हाहाकार मच गया था। लेकिन उनकी झोंपड़ी का दरवाजा, जिस पर लहू का निशान लगा था, शांत और सुरक्षित था। वह लहू सिर्फ एक जानवर का लहू नहीं था; वह एक वाचा थी, एक वादा था कि जो इस चिन्ह के अधीन है, उसे छोड़ दिया जाएगा।

भोर होने से पहले ही, पैरों के शोर और चिल्लाहट से पता चल गया कि शहर में कुछ बड़ा बदलाव आ गया है। और फिर, एक जल्दबाज़ी में आया हुआ संदेशवाहक: "फिरौन ने छुट्टी दे दी है! सबको जाने की आज्ञा है! अभी, इसी क्षण!"

ऐसी भागदौड़ शुरू हुई जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। इस्राएली, सैकड़ों-हज़ारों की संख्या में, अपना सामान उठाए, बिना खमीर का आटा गूँथे हुए, एक विशाल भीड़ के रूप में गोशन से बाहर निकलने लगे। एलियासर ने एक पल के लिए पीछे मुड़कर देखा। उसकी झोंपड़ी, दरवाजे पर लहू का निशान अब भी गहरा और स्पष्ट, खड़ी थी। उसने एक लम्बी साँस ली। यह रात केवल विनाश की रात नहीं थी। यह एक नई शुरुआत की रात थी। परमेश्वर ने अपने लोगों को बचाया था, और अब वह उन्हें एक वादे की भूमि की ओर ले जा रहा था। उस रात का नाम, उन्होंने 'पेसach' रखा—'छोड़ देना'। क्योंकि परमेश्वर की मार ने, उस लहू के चिन्ह को देखकर, उन्हें छोड़ दिया था। और एलियासर, अपने परिवार के साथ, उस भीड़ में समाते हुए, जानता था कि यह चिन्ह, और यह रात, उनकी स्मृति में सदैव अमर रहेगी।

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