सच्ची भक्ति का मार्ग
गाँव के पश्चिम में एक पुराना बरगद था, जिसकी छाया दोपहर बाद एक ठंडी शरण बन जाती थी। उसी छाया...
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फ़रवरी 2026 में प्रकाशित कहानियाँ।
गाँव के पश्चिम में एक पुराना बरगद था, जिसकी छाया दोपहर बाद एक ठंडी शरण बन जाती थी। उसी छाया...
(एक लंबी, विस्तृत कथा) वह शहर जो कभी अजेय माना जाता था, अब अपनी ही बदबू में सड़ रहा था। नीनवे की...
वह समय था जब उत्तर के पहाड़ी राज्य का नाम सुनकर ही लोगों की आँखों में चमक आ जाती थी। दान का...
यरूशलेम की उन धूलभरी गलियों की याद, जो अब खंडहर बन चुकी थीं, हनान्याह के मन में एक टीस की तरह...
वह दिन ठंड की एक साँस लेकर आया था। सुबह की धुंध, जो आम तौर पर घाटी में रेंगती है, आज पहाड़ों की...
यह उस समय की बात है जब हिजकिय्याह राजा यरूशलेम में राज करता था, और अश्शूर के सिपाही देश के...
सूरज ढलने लगा था, और हवा में केसर और सूखी मिट्टी की महक तैर रही थी। सुलेखा बरामदे की मुंडेर...
उस गाँव में जहाँ धूप सोने जैसी पिघलती थी और हवा में मिट्टी की खुशबू रहती थी, एक बूढ़ा किसान...
बेबीलोन की नदियों के किनारे की धूल कुछ अजीब थी। महीन और पीली, पर चिपचिपी। ऐसी लगती थी जैसे यह...
वह सुबह थी जब बूढ़े दाऊद ने अपनी लिखने की तख्ती सम्हाली। महल की छत पर खड़े होकर उन्होंने...
वह दिन बहुत भारी था। हवा में उमस थी, और आसफ़ के मन का बोझ हवा से भी ज़्यादा गहरा। चलते-चलते...
वह दिन भी क्या दिन था। सुबह से ही आसमान में सघन, स्लेटी बादल छाए थे, मानो स्वर्ग का कोई बोझ...
यरूशलेम की दीवारों की मरम्मत का काम पूरा हो चुका था, पर एक और काम बाकी था। वह दीवार से भी ऊँची,...
यरूशलेम की सुबह थी, ओस से भीगी हुई। राजमहल के पत्थरों पर सूरज की पहली किरणें फिसल रही थीं, पर...
येरूशलेम के महल की छाया में दाऊद बैठा था, पर उसका मन अशांत था। राज्य स्थिर था, शत्रु परास्त...
यरूशलेम की सुबह धीरे-धीरे खुल रही थी। पहाड़ियों से कोहरा सरक रहा था, और राजमहल के श्वेत...
धुप ढलने लगी थी, और गिलगाल के शिविर में आग की लपटों के चारों ओर बूढ़े योशू का घेरा सिमट आया था।...
धूप चट्टानों पर तप रही थी, और हवा में धूल के महीन कण तैरते दिखाई देते थे। एलियाकीम अपने खेमे...
सूरज ढलने लगा था, और मरुभूमि की लालिमा मिश्कान के सफेद बने तम्बू पर पड़ रही थी। हारून अपनी...
उस सुबह सूरज की पहली किरण ने जंगली जैतून के पेड़ों को सुनहरा रंग दिया था, पर एलियाकीम की नज़र...
सिनाई की उस रेगिस्तानी धरती पर हवा भी जैसे थम सी गई थी। दोपहर की तीखी धूप चट्टानों से टकराकर...
वो दिन आम दिनों जैसा ही शुरू हुआ था। मिस्र की धूप तेज थी, और हवा में रेत के महीन कण तैर रहे थे।...
वह आखिरी दिन शुरू हुआ था सामान्य सी सुबह से। आकाश में बादल तैर रहे थे, पर कोई भयावह संकेत...