एलिशा और शूनेमी स्त्री का चमत्कार
उस समय की बात है, जब गिलगाल से उठकर भविष्यद्वक्ता एलिशा ने बैतल में प्रवेश किया। वहां के...
संग्रह
फ़रवरी 2026 में प्रकाशित कहानियाँ।
उस समय की बात है, जब गिलगाल से उठकर भविष्यद्वक्ता एलिशा ने बैतल में प्रवेश किया। वहां के...
उन दिनों की बात है, जब न्यायी एक के बाद एक आते और जाते रहते थे, मानो पहाड़ी नालों का पानी,...
यरीहो की दीवारें सूरज की ढलती किरणों में ईंट के पक्के रंग की तरह जल रही थीं। शहर के अंदर हलचल...
दोपहर की झुलसा देने वाली धूप थी, जो मोआब के उन विस्तृत मैदानों पर पसरी हुई थी। हवा में धूल के...
सिनाई के विशाल रेगिस्तान में हवा भी धीरे चलती थी, मानो परमेश्वर के डेरे के आसपास की...
वह सुबह ठंडी थी, पर सूरज की किरणें तम्बू के श्वेत शिखर को छूने लगी थीं। शिमोन ने अपनी भेड़ों...
रात का अँधेरा मिस्र की धरती पर एक भारी चादर-सा लिपटा हुआ था। हवा में एक अजीब-सा सन्नाटा था,...
यह कहानी उस समय की है जब याकूब अपने भाई एसाव के क्रोध से बचकर दूर, अपने नाना लाबान के घर की ओर...
वह शाम सरदीस के पुराने बाजार में ऐसे उतरी जैसे कोई थका हुआ पंछी पेड़ की सबसे निचली डाल पर बैठ...
शाम ढल रही थी। यरूशलेम के बाहर, एक पहाड़ी की तलहटी में स्थित एक छोटी सी कुटिया के सामने,...
उस रोमी कारागार की गंध—नम पत्थर, बासी पानी, और मानवीय पीड़ा की मिली-जुली गंध—अभी भी मेरी...
उस गाँव का नाम था शांतिनगर, जो पहाड़ियों की एक शृंखला की गोद में बसा था। वहाँ की हवा में...
कई दिनों की यात्रा के बाद, समुद्र की हवा में एक खास नमकीनपन और एक ठंडी सी गंध थी। केसरिया। वह...
कमरा बड़ा था, पर उस रात हवा में एक तनाव सा भरा था, जैसे कोई भारी बादल छत के ऊपर मंडरा रहा हो।...
पहाड़ की हवा में एक तरोताज़ा करने वाली ठंडक थी, ठीक उस सुबह जब यीशु ने पतरस, याकूब और उसके भाई...
यरूशलेम की वह सुबह ठंडी और धुंधली थी। हवा में नमी थी, और टूटे हुई शहर की दीवारों के पत्थरों...
टेकोआ के पहाड़ों की ओर से आने वाली हवा में धूल और सूखे की गंध थी। आमोस अपनी भेड़ों के बीच...
एक सर्द सुबह, यरूशलेम के पुराने तपस्वी याजक, एलीआजर, अपनी कुटिया की खिड़की से पूर्व की ओर देख...
वह सुबह थी जब वह बोला। हवा में चुप्पी थी, पर शब्द इतने स्पष्ट थे कि लगा जैसे पत्थरों के दिलों...
मिसपा का किला सूरज की तिरछी किरणों में एक उदास सुनहराई लिए खड़ा था। यह वह स्थान था जहाँ बाबुल...
वह एक पुराने जैतून के पेड़ के नीचे बैठा था, जिसकी जड़ें पहाड़ी की चट्टानों में उलझी हुई थीं।...
वह कुम्हार अपने खाली चाक के सामने बैठा था। हाथों में मिट्टी का स्पर्श महीनों से भूला हुआ...
यहूदा के सुनसान पहाड़ों पर एक दोपहर, हवा में ठंडक थी और आसमान सीसे जैसा भारी लग रहा था।...
यह बात है आगूर की, याकीन के पुत्र की। वह दमिश्क के उत्तर में, एक ऐसे गाँव में रहता था जहाँ से...