आत्मा की अगुवाई में आज़ादी
मोहन अपनी झोपड़ी की देहरी पर बैठा, सूरज ढलने का इंतज़ार कर रहा था। दिनभर की गर्मी की मार से...
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मोहन अपनी झोपड़ी की देहरी पर बैठा, सूरज ढलने का इंतज़ार कर रहा था। दिनभर की गर्मी की मार से...
कोरिन्थ का बंदरगाह दोपहर की धूप में चमक रहा था। हवा में नमक और जहाजों के रस्सों की गंध, तेल...
उस धूल भरे रास्ते पर, जहाँ जैतून के पेड़ों की छाया लगभग खत्म हो रही थी और खुले मैदान की गर्मी...
यरूशलेम की रातें एक अजीब सी सन्नाटे से भरी होती थीं। दिन भर की धूप की गर्मी पत्थरों से...
वह सुबह जैतून के पहाड़ की ढलानों से उतर रहा था, तो हवा में बसन्त की एक कोमल सुगंध थी। यरूशलेम...
उस गाँव में, जहाँ धूल के बादल हमेशा मौसम का हाल बताया करते थे, यूसुफ़ नाम का एक बूढ़ा किसान...
हबक्कूक उस ऊँची पहाड़ी पर खड़ा था जहाँ से यरूशलेम के पत्थर घरों की छतें और मंदिर का शिखर...
उन दिनों की बात है, जब शोमरोन का पहाड़़ अभी भी हरा-भरा था, और उसकी तलहटी में बसा इज़राइल का...
उस दिन की बात है जब हवा में एक अजीब-सी गंध थी। सर्दियों की वह सुबह, जब कोहरा यरूशलेम के...
वह दिन ऐसा था जैसे आकाश ने सीसे का रंग पहन लिया हो। धूप भी कुछ अजीब थी—न तो तेज़, न मंद, बल्कि एक...
वह दिन भी याद आता है, जब बाबुल की नहर के किनारे बैठा मैं, एक बूढ़ा यहूदी, अपने हाथों में मिट्टी...
खंडहरों के बीच बैठा एलियाकीम अपनी लाठी को रेत में घुमा रहा था। शाम की लाली दीवारों के अधजले...
(यह कहानी यशायाह 33 के भाव और विषयों पर आधारित एक कल्पनाशील विस्तार है, जो ऐतिहासिक संदर्भ...
यरूशलेम की सड़कें उस गर्मी में तपती थीं, जैसे कोई अदृश्य आग नगर की नींव तक को भस्म करने पर...
सुबह की धूप खिड़की से फिसलकर मिट्टी के फर्श पर एक सुनहरा चौखटा बना रही थी। रामलाल दादा अपनी...
सूरज ढलने लगा था, और आकाश में केसरिया और बैंगनी रंग फैल रहे थे। नदी किनारे बैठा वह बूढ़ा,...
वह नदी के किनारे बैठा था, और पानी की धारा में उसका प्रतिबिंब टूट-टूट कर बह रहा था। हवा ठंडी थी,...
वह दिन ढलने को था, और आकाश में लालिमा फैली हुई थी, जैसे कोई घाव धीरे-धीरे सूख रहा हो। हवा में...