**भजन संहिता 3 पर आधारित एक विस्तृत बाइबल कहानी**
एक समय की बात है, जब दाऊद राजा अपने ही पुत्र अबशालोम के विद्रोह के कारण भारी संकट में फँस गया। अबशालोम ने न केवल अपने पिता के विरुद्ध षड्यंत्र रचा, बल्कि उसने इतनी शक्ति इकट्ठी कर ली कि दाऊद को यरूशलेम छोड़कर भागना पड़ा। दाऊद के अपने ही लोग, जिन पर उसे भरोसा था, अब उसके विरुद्ध खड़े हो गए। उसके मित्र उसके शत्रु बन गए, और लोगों ने उसके बारे में कहना शुरू कर दिया, "परमेश्वर उसकी सहायता नहीं करेगा।"
भागते हुए दाऊद के मन में भय और निराशा छा गई। वह जानता था कि अबशालोम के पास एक विशाल सेना है, और उसके पीछे इतने लोग लग गए हैं कि मानो सारा इस्राएल ही उसके विरुद्ध हो गया हो। एक रात, जब वह जंगल की ओर बढ़ रहा था, उसने आकाश की ओर देखा और अपने हृदय में परमेश्वर से प्रार्थना की।
उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन उसके विश्वास ने उसे सहारा दिया। उसने कहा, "हे यहोवा, मेरे शत्रु कितने बढ़ गए हैं! कितने लोग मेरे विरुद्ध खड़े हो रहे हैं। वे मेरे बारे में कहते हैं कि परमेश्वर भी उसका उद्धार नहीं करेगा।"
लेकिन फिर उसने अपने हृदय में परमेश्वर की स्मृति को जगाया। उसने याद किया कि कैसे परमेश्वर ने उसे गोलियत के सामने विजय दिलाई थी, कैसे उसने उसे शाऊल के हाथों से बचाया था, और कैसे वह उसकी सुरक्षा और महिमा का स्रोत रहा था। दाऊद ने अपनी प्रार्थना जारी रखी, "परन्तु तू, हे यहोवा, मेरे लिए ढाल है, तू मेरी महिमा है, और मेरे सिर को ऊँचा उठाने वाला है।"
उस रात, जब वह सोने के लिए लेटा, तो उसके चारों ओर शत्रुओं की सेना थी, लेकिन उसका हृदय शांत था। उसने परमेश्वर पर भरोसा रखा और गहरी नींद में सो गया। सुबह जब उसकी आँख खुली, तो उसने स्वयं को सुरक्षित पाया। उसने कहा, "मैं सोया और जाग गया, क्योंकि यहोवा मेरा सहारा है। मैं उन लाखों लोगों से नहीं डरता, जो चारों ओर से मुझे घेरे हुए हैं।"
दाऊद ने अपनी तलवार उठाई और अपने विश्वासयोग्य सैनिकों को इकट्ठा किया। उसने कहा, "उठो, हे यहोवा! मेरे परमेश्वर, मुझे बचा! तू ने मेरे सब शत्रुओं के मुँह को तोड़ दिया है और दुष्टों के दाँत खट्टे कर दिए हैं।"
युद्ध के मैदान में, दाऊद की छोटी सी सेना ने अबशालोम की विशाल सेना का सामना किया। परमेश्वर ने दाऊद को विजय दी, क्योंकि उसने अपना सारा भरोसा प्रभु में रखा था। अंत में, दाऊद ने जयगान करते हुए कहा, "उद्धार यहोवा ही की ओर से है; तेरी प्रजा पर तेरी आशीष हो!"
इस प्रकार, दाऊद ने सीखा कि चाहे संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो, परमेश्वर उनकी सहायता करता है जो उस पर भरोसा रखते हैं। भजन संहिता 3 हमें यही सिखाती है कि परमेश्वर हमारा सच्चा सहारा है, और उसकी सुरक्षा में हम निडर होकर जीवन जी सकते हैं।
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