Bible Story
दाऊद की प्रार्थना और परमेश्वर का न्याय
**भजन संहिता 35 पर आधारित एक विस्तृत कहानी** **शीर्षक: "दाऊद की प्रार्थना और परमेश्वर का न्याय"**...
**भजन संहिता 35 पर आधारित एक विस्तृत कहानी**
**शीर्षक: "दाऊद की प्रार्थना और परमेश्वर का न्याय"**
एक समय की बात है, जब दाऊद राजा शाऊल और उसके सैनिकों से छिपते हुए यहूदा के जंगलों में भटक रहा था। उसके चारों ओर शत्रु घेरा डाले हुए थे, और उसके अपने ही मित्र उसके विरोधी बन गए थे। दाऊद का हृदय दुख से भरा हुआ था, क्योंकि जिन लोगों के लिए उसने भलाई की थी, वे ही अब उसे नष्ट करने के लिए षड्यंत्र रच रहे थे। एक दिन, जब वह एक गुफा में छिपा हुआ था, तो उसने परमेश्वर के सामने अपनी पीड़ा को व्यक्त किया और भजन संहिता 35 के शब्दों में प्रार्थना की।
### **दाऊद की पुकार**
दाऊद ने अपने हाथ उठाकर परमेश्वर से कहा, **"हे प्रभु, मेरे विरोधियों से लड़ाई लो, उनसे युद्ध करो जो मुझसे युद्ध करते हैं। ढाल और सन्नाह को थाम लो और मेरी सहायता के लिए खड़े हो जाओ। मुझे विजय दिलाने के लिए भाले और कुल्हाड़ी उठा लो। मेरे प्राण के शत्रुओं से कहो, 'मैं तुम्हारा उद्धारकर्ता हूँ!'"**
उसकी आँखों में आँसू थे, क्योंकि वह जानता था कि परमेश्वर ही उसका एकमात्र सहारा है। उसने अपने मन में उन लोगों को याद किया जो उसके विरुद्ध झूठी गवाही दे रहे थे। कुछ तो उसके सामने मित्र बनकर आते थे, लेकिन पीठ पीछे वे उसके लिए जाल बिछाते थे। दाऊद ने परमेश्वर से प्रार्थना की, **"हे यहोवा, उन्हें लज्जित होने दो जो मेरे प्राण के लिए घात लगाए बैठे हैं। उन्हें पीछे हटने दो जो मेरी हानि की योजना बनाते हैं।"**
### **शत्रुओं की चाल**
जंगल में दाऊद के शत्रु उसका पीछा कर रहे थे। वे चुपके से उसकी गतिविधियों पर नजर रखते थे और उसे फँसाने के लिए झूठे इल्जाम लगाते थे। एक दिन, उन्होंने राजा शाऊल को बताया कि दाऊद उसके विरुद्ध विद्रोह की योजना बना रहा है। शाऊल ने क्रोधित होकर अपने सैनिकों को आदेश दिया कि दाऊद को जीवित या मृत पकड़कर लाया जाए।
लेकिन दाऊद ने परमेश्वर पर भरोसा रखा। उसने कहा, **"मेरा प्रभु न्यायी है, और वह मेरे पक्ष में खड़ा होगा। जो लोग मेरे विरुद्ध झूठ बोलते हैं, उनका मुँह बंद हो जाएगा।"**
### **परमेश्वर का हस्तक्षेप**
एक रात, जब दाऊद और उसके साथी सो रहे थे, तो शाऊल के सैनिकों ने उन पर हमला करने की योजना बनाई। लेकिन परमेश्वर ने दाऊद की रक्षा की। अचानक, एक भयंकर आँधी उठी, और शत्रु भ्रमित हो गए। वे एक-दूसरे को ही शत्रु समझकर लड़ने लगे। सुबह होते-होते, वे सभी भाग खड़े हुए।
दाऊद ने आकाश की ओर देखा और परमेश्वर का धन्यवाद दिया। उसने कहा, **"हे प्रभु, तू ने मेरी लड़ाई लड़ी है! तेरा न्याय सिद्ध है, और तू ने मुझे मेरे शत्रुओं से बचा लिया है।"**
### **आनन्द और विजय**
जब दाऊद ने देखा कि परमेश्वर ने उसके शत्रुओं को पराजित कर दिया है, तो उसका हृदय आनन्द से भर गया। उसने एक नया गीत गाया: **"मेरी आत्मा तेरे उद्धार में आनन्दित होगी। मैं सदैव तेरी स्तुति करूँगा और कहूँगा, 'हे यहोवा, तेरे समान कोई नहीं! तू दीनों को बचाता है और अहंकारियों को नीचा दिखाता है।'"**
दाऊद ने सीखा कि परमेश्वर उनकी सुनता है जो धर्मी हैं और उनकी रक्षा करता है। उसने अपने सभी साथियों से कहा, **"परमेश्वर पर भरोसा रखो, क्योंकि वह सच्चा न्यायी है। वह कभी अपने भक्तों को नहीं छोड़ता।"**
और इस प्रकार, दाऊद की प्रार्थना सुनकर परमेश्वर ने उसे विजय दिलाई, और उसके सभी शत्रु लज्जित हुए।
**समाप्त।**