**मलाकी 4: प्रभु के दिन की तैयारी**
उस समय यहूदा के पहाड़ों पर सूरज की किरणें धीरे-धीरे फैल रही थीं, लेकिन लोगों के हृदय अंधकार से भरे हुए थे। याजकों ने परमेश्वर की आराधना को साधारण बना दिया था, और लोगों ने अपने जीवन में धर्म को पीछे छोड़ दिया था। तब परमेश्वर ने मलाकी नबी के माध्यम से अपने लोगों को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया।
मलाकी ने लोगों को इकट्ठा किया और उनसे कहा, **"सुनो, परमेश्वर यहोवा का वचन! देखो, वह दिन आ रहा है जो भट्ठी की तरह जलता हुआ आएगा। सभी अहंकारी और दुष्ट लोग उस दिन परमेश्वर के क्रोध की आग में झुलस जाएँगे, जैसे घास जलकर राख हो जाती है। उस दिन उनके लिए कोई जड़ या शाखा नहीं बचेगी।"**
लोगों के चेहरों पर भय छा गया। कुछ ने पूछा, **"फिर हम जो परमेश्वर का नाम लेते हैं, हमारा क्या होगा?"**
मलाकी ने आशा भरी आवाज़ में उत्तर दिया, **"लेकिन तुम्हारे लिए जो मेरे नाम का भय मानते हो, धर्म का सूर्य उदय होगा, और उसकी किरणों में चंगाई होगी। तुम बछड़ों की तरह उछलते हुए स्वतंत्रता से विचरण करोगे। तुम दुष्टों को रौंद डालोगे, क्योंकि वे उस दिन राख बन चुके होंगे।"**
फिर मलाकी ने उन्हें याद दिलाया, **"याद रखो, परमेश्वर ने हमें मूसा की व्यवस्था दी थी, जिसमें सच्चाई और न्याय का मार्ग बताया गया है। उसकी आज्ञाओं का पालन करो। और देखो, प्रभु ने यह भी वादा किया है कि वह एलिय्याह नबी को तुम्हारे पास भेजेगा, जो प्रभु के भयानक दिन से पहले लोगों के हृदयों को माता-पिता की ओर और बच्चों के हृदयों को उनके पूर्वजों की ओर मोड़ देगा। वह तुम्हें तैयार करेगा, ताकि जब प्रभु आए, तो तुम उसके लिए सजग हो।"**
लोगों ने मलाकी की बातों को गंभीरता से सुना। कुछ ने पश्चाताप किया और अपने जीवन को सुधारने का निश्चय किया, जबकि कुछ अभी भी संदेह में थे। लेकिन मलाकी ने उन्हें चेतावनी दी, **"यदि तुम चेतावनी नहीं मानोगे, तो प्रभु के दिन तुम्हारे लिए विनाश लेकर आएगा। परन्तु जो परमेश्वर की आशा में बने रहते हैं, वे उसकी महिमा में सदा के लिए आनन्दित होंगे।"**
और इस प्रकार, मलाकी के वचनों ने लोगों के हृदयों में एक नई चिंगारी जगाई। वे जान गए कि परमेश्वर का दिन निकट है, और उसके लिए तैयार रहना ही बुद्धिमानी है।