**बाढ़ के बाद नूह और परमेश्वर की वाचा**
उस समय संसार में बड़ी उथल-पुथल मची हुई थी। परमेश्वर ने पृथ्वी को जलप्रलय से शुद्ध किया था, और केवल नूह, उसके परिवार, और जहाज़ में सुरक्षित रखे गए जीव ही बचे थे। जब जल धीरे-धीरे उतर गया और पृथ्वी सूखने लगी, तो नूह ने अपने साथियों के साथ जहाज़ से बाहर कदम रखा। उनकी आँखों के सामने एक नई दुनिया थी—शुद्ध, ताज़ा, और परमेश्वर के आशीर्वाद से भरी हुई।
नूह ने सबसे पहले परमेश्वर के प्रति कृतज्ञता प्रकट की। उसने एक वेदी बनाई और उस पर शुद्ध पशुओं और पक्षियों की बलि चढ़ाई। सुगंधित धुआँ आकाश की ओर उठा, और परमेश्वर ने उसे ग्रहण किया। वह नूह के हृदय की ईमानदारी से प्रसन्न हुआ और मन में विचार किया, "मैं फिर कभी मनुष्य के कारण पृथ्वी को शाप नहीं दूँगा, भले ही मनुष्य का मन बचपन से ही बुराई की ओर झुका हुआ है। न तो मैं फिर कभी सब प्राणियों को जलप्रलय से नष्ट करूँगा।"
तब परमेश्वर ने नूह और उसके पुत्रों—शेम, हाम और येपेत—को आशीर्वाद दिया और कहा, "फलो-फूलो, बढ़ो और पृथ्वी को भर दो। सारे पशु, पक्षी, और जलचर तुम्हारे भय और आधीन रहेंगे। मैंने उन्हें तुम्हारे हाथ में दे दिया है। अब तुम सब मांस खा सकते हो, परन्तु उसका खून, जो कि प्राण का प्रतीक है, नहीं खाना। यदि कोई मनुष्य या पशु किसी मनुष्य का खून बहाएगा, तो उसका भी खून बहाया जाएगा, क्योंकि परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप में बनाया है।"
फिर परमेश्वर ने एक महत्वपूर्ण वाचा स्थापित की। उसने कहा, "मैं तुम्हारे साथ और तुम्हारे बाद आने वाली सभी पीढ़ियों के साथ अपनी वाचा बाँधता हूँ। मैं फिर कभी जलप्रलय से सारे प्राणियों को नष्ट नहीं करूँगा। इस वाचा का प्रतीक मेरा धनुष होगा, जिसे मैं बादलों में रखूँगा। जब कभी बादल पृथ्वी पर छाएँगे, तो यह धनुष दिखाई देगा, और मैं उसे देखकर तुम्हारे साथ की गई अपनी वाचा को याद करूँगा।"
नूह ने आकाश की ओर देखा, और वहाँ इंद्रधनुष चमक रहा था—रंग-बिरंगी किरणें आकाश और पृथ्वी को जोड़ती हुई प्रतीत होती थीं। यह परमेश्वर की प्रतिज्ञा का दृश्य प्रमाण था। नूह का हृदय शांति और आनंद से भर गया। उसने अपने पुत्रों को बुलाया और परमेश्वर के वचन सुनाए। सभी ने मिलकर परमेश्वर की स्तुति की।
इस प्रकार, नूह और उसके परिवार ने नई पृथ्वी पर अपना जीवन आरंभ किया। वे खेती करने लगे, पशुपालन करने लगे, और धीरे-धीरे पृथ्वी फिर से बसने लगी। परन्तु नूह हमेशा उस वाचा को याद करता, जो परमेश्वर ने मानवजाति के साथ बाँधी थी। वह जानता था कि परमेश्वर दयालु और सत्यनिष्ठ है, और उसकी प्रतिज्ञाएँ सदा स्थिर रहती हैं।
और इस प्रकार, जब भी आकाश में इंद्रधनुष दिखाई देता, लोगों को याद आता कि परमेश्वर उनके साथ है, और उसकी दया अनंतकाल तक बनी रहेगी।
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