# **नामान का चमत्कारिक उपचार (2 राजाओं 5)**
## **1. नामान – एक शक्तिशाली सेनापति**
अराम देश के महान सेनापति नामान अपने राजा की नज़रों में बहुत आदरपात्र था। वह एक वीर योद्धा था, जिसने अनेक युद्धों में विजय प्राप्त की थी। उसके पास धन, सम्मान और सत्ता सब कुछ था। परन्तु एक बड़ी समस्या उसके जीवन को अंधकारमय बना रही थी – वह कोढ़ से पीड़ित था।
उन दिनों कोढ़ को एक अभिशाप समझा जाता था। यह रोग न केवल शरीर को कमज़ोर करता था, बल्कि व्यक्ति को समाज से अलग कर देता था। नामान चाहे कितना भी बलवान क्यों न हो, इस बीमारी के सामने वह असहाय था।
## **2. एक छोटी सी दासी की सलाह**
नामान के घर में एक छोटी इज़राइली लड़की दासी के रूप में काम करती थी। वह परमेश्वर में अटूट विश्वास रखती थी। एक दिन उसने अपनी स्वामिनी से कहा, "काश मेरा स्वामी शोमरोन के भविष्यद्वक्ता एलीशा के पास जाता! वह उसके कोढ़ को अवश्य दूर कर देता।"
यह बात नामान की पत्नी ने उसे बताई। नामान ने अपने राजा से अनुमति माँगी और इज़राइल की ओर चल पड़ा। उसने राजा के लिए बहुमूल्य उपहार ले लिए – चाँदी, सोना और बहुमूल्य वस्त्र।
## **3. नामान का इज़राइल के राजा के पास जाना**
नामान इज़राइल के राजा के पास पहुँचा और उसने एलीशा के बारे में बताया। परन्तु इज़राइल का राजा घबरा गया। उसने सोचा, "क्या अराम का राजा मुझे फँसाना चाहता है? क्या वह मुझसे कोढ़ ठीक करने को कह रहा है? यह तो केवल परमेश्वर ही कर सकता है!"
जब एलीशा को यह बात पता चली, तो उसने राजा से कहा, "उसे मेरे पास भेज दो, ताकि वह जान ले कि इज़राइल में एक भविष्यद्वक्ता है!"
## **4. नामान का एलीशा के घर पहुँचना**
नामान अपने घोड़ों और रथों के साथ एलीशा के घर के द्वार पर आकर खड़ा हो गया। उसने सोचा था कि भविष्यद्वक्ता स्वयं बाहर आएगा, प्रार्थना करेगा और उस पर हाथ रखकर उसे चंगा कर देगा। परन्तु एलीशा ने स्वयं नहीं आकर अपने सेवक को भेजा, जिसने कहा, "यरदन नदी में सात बार नहा लो, तेरा शरीर पूर्णतः स्वच्छ हो जाएगा।"
## **5. नामान का क्रोध और गर्व का पतन**
नामान को यह बात बहुत बुरी लगी। वह क्रोधित होकर बोला, "मैंने सोचा था कि वह बाहर आकर परमेश्वर का नाम लेगा और मेरे कोढ़ को ठीक कर देगा! क्या दमिश्क की नदियाँ – अबाना और फर्पर – इज़राइल की सभी नदियों से बेहतर नहीं हैं? क्या मैं उनमें नहाकर शुद्ध नहीं हो सकता?"
वह रुष्ट होकर वापस जाने लगा। परन्तु उसके सेवकों ने समझाया, "हे स्वामी, यदि भविष्यद्वक्ता ने आपसे कोई बड़ा काम करने को कहा होता, तो क्या आप नहीं करते? फिर इस साधारण से आज्ञा का पालन क्यों नहीं करते?"
## **6. नामान का यरदन में सात बार डुबकी लगाना**
नामान ने अपने सेवकों की बात मान ली। वह यरदन नदी के पास गया और सात बार पानी में डुबकी लगाई। जैसे ही उसने सातवीं बार नदी से बाहर कदम रखा, उसका शरीर एकदम स्वच्छ हो गया – उसकी त्वचा बच्चे के समान कोमल और निर्मल हो गई!
## **7. नामान का परमेश्वर की महिमा करना**
वह आनन्द से भर गया और एलीशा के पास लौटकर बोला, "अब मैं जान गया हूँ कि पृथ्वी पर केवल इज़राइल के परमेश्वर ही सच्चे परमेश्वर हैं! कृपया मेरी भेंट स्वीकार करें।"
परन्तु एलीशा ने उत्तर दिया, "जिस परमेश्वर की मैं सेवा करता हूँ, उसकी शपथ! मैं कुछ भी नहीं लूँगा।" नामान ने बार-बार आग्रह किया, पर एलीशा ने मना कर दिया।
## **8. नामान का नया विश्वास और प्रतिज्ञा**
नामान ने कहा, "यदि आप नहीं लेंगे, तो कृपया मुझे इस भूमि की मिट्टी दे दें, ताकि मैं अपने देश में जाकर इस पर बलिदान चढ़ाऊँ। अब से मैं केवल यहोवा की उपासना करूँगा।"
एलीशा ने उसे आशीर्वाद दिया, और नामान आनन्दित मन से अपने देश लौट गया।
## **9. गेहजी का लोभ और दण्ड**
परन्तु एलीशा के सेवक गेहजी ने लालच में आकर नामान का पीछा किया और उससे धन झूठ बोलकर ले लिया। जब एलीशा को यह पता चला, तो उसने गेहजी को शाप दिया, "नामान का कोढ़ सदा के लिए तेरे और तेरे वंश पर रहेगा!"
और ऐसा ही हुआ – गेहजी कोढ़ग्रस्त हो गया।
## **10. सबक**
इस कहानी से हम सीखते हैं कि परमेश्वर की आज्ञा का सरल विश्वास से पालन करना कितना महत्वपूर्ण है। नामान का गर्व टूटा, उसने विनम्रता से आज्ञा मानी, और चंगा हुआ। वहीं गेहजी का लोभ उसके विनाश का कारण बना।
**"परमेश्वर का राज्य उन्हीं का है, जो बालकों के समय सरलता से उस पर भरोसा रखते हैं।"**
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