**अय्यूब की विजय और परमेश्वर की कृपा**
अय्यूब ने अपने सारे दुःख और परीक्षाओं के बाद, परमेश्वर के वचनों को सुना और उसकी महिमा को अपने हृदय में महसूस किया। वह धरती पर बैठा हुआ था, उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन अब वे दुःख के नहीं, बल्कि आत्मिक ज्ञान और विनम्रता के आँसू थे। उसने अपने मुँह से वे शब्द कहे जो उसके हृदय की गहराई से निकले:
**"मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है, और कोई तेरी योजना को रोक नहीं सकता। जो बात मुझे समझ में नहीं आती थी, उसके बारे में मैंने बिना ज्ञान के बातें की। मैंने तुझे केवल सुनने से ही जाना था, पर अब मेरी आँखें तुझे देखती हैं। इसलिए मैं अपने आप को धिक्कारता हूँ और धूल और राख में पश्चाताप करता हूँ।"**
ये शब्द कहकर अय्यूब ने अपने आप को पूरी तरह से परमेश्वर के सामने झुका दिया। उसका अहंकार, उसके प्रश्न, उसकी शिकायतें—सब कुछ धूल में मिल गया। वह जान गया कि परमेश्वर की योजनाएँ उसकी समझ से परे हैं, और उसकी महिमा अनंत है।
### **परमेश्वर का आदेश और अय्यूब की बहाली**
तब परमेश्वर ने अय्यूब के मित्रों से कहा: **"मेरा क्रोध तुम तीनों पर भड़का है, क्योंकि तुमने मेरे विषय में वही बात कही जो ठीक नहीं थी, जबकि मेरे दास अय्यूब ने सच्ची बात कही। इसलिए अब सात बैल और सात मेढ़े लेकर अय्यूब के पास जाओ और अपने लिए बलिदान चढ़ाओ। मेरा दास अय्यूब तुम्हारे लिए प्रार्थना करेगा, और मैं उसकी प्रार्थना स्वीकार करूँगा।"**
अय्यूब के मित्र—एलीपज, बिलदद और सोफर—डरते हुए उसके पास गए और परमेश्वर के आदेश के अनुसार बलिदान चढ़ाया। अय्यूब ने उनके लिए प्रार्थना की, और परमेश्वर ने उसकी प्रार्थना सुन ली। उसने उनके पापों को क्षमा कर दिया।
### **अय्यूब का नया जीवन**
इसके बाद, परमेश्वर ने अय्यूब के दुःख को दूर किया और उसकी संपत्ति को दोगुना कर दिया। उसके सभी भाई-बहन और पुराने मित्र उसके पास आए और उसके साथ भोजन किया। उन्होंने उसके लिए सांत्वना दी और उसे चाँदी व सोने के सिक्के भेंट किए।
परमेश्वर ने अय्यूब को पहले से भी अधिक आशीष दी: - उसके पास **चौदह हज़ार भेड़-बकरियाँ, छः हज़ार ऊँट, दो हज़ार गायें और एक हज़ार गधियाँ** हो गईं। - उसे **सात पुत्र और तीन पुत्रियाँ** फिर से प्रदान की गईं। - उसकी पुत्रियाँ सारे देश में सबसे सुंदर थीं, और उन्हें उनके भाइयों के साथ संपत्ति में हिस्सा मिला।
अय्यूब ने अपनी बेटियों के नाम **यमीमा, कसीया और किरेन-हप्पुक** रखे, जो उसके जीवन की नई मिठास को दर्शाते थे।
### **अय्यूब की मृत्यु और विरासत**
अय्यूब एक सौ चालीस वर्ष और जीवित रहा। वह अपने बच्चों, पोतों और परपोतों को देखता रहा। अंत में, **वह बुढ़ापे में संतुष्ट होकर परमेश्वर के पास चला गया।**
उसकी कहानी हमेशा के लिए लिख दी गई, ताकि सभी जान सकें कि **परमेश्वर की दया अंत में विजयी होती है, और जो उस पर भरोसा रखता है, उसे वह कभी नहीं छोड़ता।**
**"अय्यूब ने धैर्य धारण किया, और प्रभु ने उसके साथ करुणा की।"** (याकूब 5:11)
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