**दानिय्येल अध्याय 1: बाबुल की परीक्षा**
बाबुल के महान राजा नबूकदनेस्सर ने यरूशलेम पर चढ़ाई की और उसे जीत लिया। उसने परमेश्वर के मन्दिर के पवित्र बर्तनों को लूटकर अपने देश के देवता के खजाने में रख दिया। राजा ने अपने दरबारी अशपनज को आज्ञा दी कि इस्त्राएल के कुलीन परिवारों के कुछ युवकों को चुनकर उन्हें बाबुल लाया जाए। ये युवक सुन्दर, बुद्धिमान और विद्या में निपुण होने चाहिए थे, ताकि वे राजकीय सेवा के योग्य बन सकें।
इन युवकों में से चार का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय था: दानिय्येल, हनन्याह, मीशाएल और अजर्याह। उनके मूल नामों के स्थान पर बाबुल के अधिकारियों ने उन्हें नए नाम दिए: दानिय्येल को बेलतशस्सर, हनन्याह को शद्रक, मीशाएल को मेशक और अजर्याह को अबेदनगो कहा जाने लगा।
राजा ने आदेश दिया कि इन युवकों को तीन वर्ष तक राजभोजन में से भोजन और दाखमधु दिया जाए, ताकि वे स्वस्थ और बलवान बनें। परन्तु दानिय्येल ने अपने मन में ठान लिया कि वह राजा का भोजन नहीं खाएगा, क्योंकि वह परमेश्वर की व्यवस्था के अनुसार अशुद्ध था। उसने अशपनज से विनती की कि उसे और उसके साथियों को केवल सब्जियाँ और पानी दिया जाए।
अशपनज चिंतित हो गया। उसने कहा, "यदि तुम स्वस्थ न रहे और राजा को तुम्हारा रूप-रंग दूसरे युवकों से कमजोर लगा, तो वह मेरा सिर काट देगा!"
किन्तु दानिय्येल ने उससे कहा, "हमें दस दिन का अवसर दो। हमें केवल सब्जियाँ और पानी दिया जाए, फिर हमारा और उन युवकों का रूप देखो जो राजा का भोजन खाते हैं। फिर तुम्हारी इच्छा के अनुसार करना।"
अशपनज ने उनकी बात मान ली। दस दिन बाद, जब उसने उनकी तुलना अन्य युवकों से की, तो वह आश्चर्यचकित रह गया! दानिय्येल और उसके मित्र अन्य सभी से अधिक स्वस्थ, बलवान और ज्ञानवान दिखाई दे रहे थे। तब से उसने उन्हें राजभोजन के स्थान पर सब्जियाँ ही देना जारी रखा।
परमेश्वर ने इन चारों युवकों को असाधारण बुद्धि और समझ प्रदान की। दानिय्येल को स्वप्नों और दर्शनों की व्याख्या करने की भी योग्यता मिली। जब तीन वर्ष पूरे हुए, तो राजा ने सभी युवकों को बुलाकर उनकी परीक्षा ली। दानिय्येल, हनन्याह, मीशाएल और अजर्याह सभी में सबसे अधिक विद्वान और बुद्धिमान निकले। वे राजदरबार में सेवा करने लगे, और जब भी राजा ने उनसे कोई जटिल प्रश्न पूछा, उन्होंने सभी जादूगरों और विद्वानों से दस गुना अधिक बुद्धिमत्ता दिखाई।
इस प्रकार, दानिय्येल और उसके साथियों ने सिद्ध कर दिया कि परमेश्वर के प्रति निष्ठा रखने वालों को वह सदैव सामर्थ्य और ज्ञान प्रदान करता है। उनकी आज्ञाकारिता और विश्वास ने बाबुल के राज्य में भी परमेश्वर की महिमा प्रकट की।
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