यह कहानी जकर्याह नबी के समय की है, जब परमेश्वर ने उन्हें एक अद्भुत दर्शन दिखाया। यह दर्शन इस्राएल के लोगों के लिए आशा और प्रोत्साहन का संदेश लेकर आया था। जकर्याह ने यह दर्शन उस समय देखा जब इस्राएल के लोग बाबुल की गुलामी से छूटकर यरूशलेम लौटे थे और मंदिर का पुनर्निर्माण कर रहे थे। यह काम आसान नहीं था, क्योंकि उनके आसपास के लोग उन्हें रोकने और डराने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे में, परमेश्वर ने जकर्याह को एक दर्शन दिखाकर उन्हें प्रोत्साहित किया।
जकर्याह ने देखा कि उनके सामने एक सोने का दीपाधार है। यह दीपाधार साधारण नहीं था, बल्कि बहुत ही भव्य और विस्तृत था। इसके ऊपर एक कटोरा था, जिसमें से सात दीपक निकल रहे थे। हर दीपक के ऊपर सात-सात मुंह थे, जो चारों ओर प्रकाश फैला रहे थे। दीपाधार के दोनों ओर दो जैतून के पेड़ थे, जिनकी शाखाएं कटोरे तक फैली हुई थीं। यह दृश्य इतना चमकदार और जीवंत था कि जकर्याह हैरान रह गए।
तब परमेश्वर के दूत ने जकर्याह से पूछा, "क्या तुम जानते हो कि यह क्या है?" जकर्याह ने उत्तर दिया, "नहीं, मेरे प्रभु।" तब दूत ने उन्हें समझाया, "यह परमेश्वर का वचन है जो जरूब्बाबेल से कहता है: 'न तो शक्ति से, न ही बल से, बल्कि मेरे आत्मा के द्वारा ही यह काम पूरा होगा।' हे महान पर्वत, तुम जरूब्बाबेल के सामने क्या हो? तुम एक मैदान बन जाओगे! वह शिला को आगे लाएगा, और लोग पूछेंगे, 'यह किसकी सुंदरता और महिमा है?' तब वे जानेंगे कि यह परमेश्वर का हाथ है।"
यह संदेश जकर्याह और इस्राएल के लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण था। यह उन्हें याद दिलाता था कि परमेश्वर उनके साथ है और उनका काम उनकी अपनी ताकत से नहीं, बल्कि परमेश्वर के आत्मा के द्वारा पूरा होगा। जरूब्बाबेल, जो यहूदा के गवर्नर थे, को यह बताया गया कि वे निराश न हों, क्योंकि परमेश्वर उनके साथ है और उनका काम सफल होगा।
दीपाधार का दर्शन इस्राएल के लोगों के लिए एक प्रतीक था। दीपाधार परमेश्वर के आत्मा का प्रतिनिधित्व करता था, जो उनके जीवन और काम में प्रकाश और शक्ति देता है। दो जैतून के पेड़, जो दीपाधार के पास थे, परमेश्वर के दो अभिषिक्त लोगों को दर्शाते थे: जरूब्बाबेल और यहोशू, जो इस्राएल के नेता थे। यह दिखाता था कि परमेश्वर उन्हें अपने आत्मा से भरकर उनके काम को आगे बढ़ाएगा।
जकर्याह ने यह संदेश इस्राएल के लोगों को दिया, और उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे निराश न हों। उन्हें याद दिलाया गया कि परमेश्वर का वचन सच्चा है, और उनका काम उनकी अपनी ताकत से नहीं, बल्कि परमेश्वर की शक्ति से पूरा होगा। यह संदेश आज भी हमारे लिए प्रासंगिक है, क्योंकि यह हमें याद दिलाता है कि हमारी सफलता हमारी अपनी क्षमता पर निर्भर नहीं है, बल्कि परमेश्वर की कृपा और आत्मा पर निर्भर है।
इस तरह, जकर्याह के दर्शन ने इस्राएल के लोगों को नई आशा और साहस दिया, और उन्हें यकीन दिलाया कि परमेश्वर उनके साथ है और उनका काम पूरा करेगा। यह कहानी हमें भी यही सिखाती है कि हमें परमेश्वर पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि वही हमारी सच्ची ताकत और प्रकाश है।
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