1 इतिहास 1 पुराना नियम

वंशावली की जीवंत धारा

यह सर्दियों की एक शाम थी, जब हवा में धुँधलका और चूल्हे की सुगंध मिल रही थी। दाऊद के महल के एक...

1 इतिहास 1 - वंशावली की जीवंत धारा

यह सर्दियों की एक शाम थी, जब हवा में धुँधलका और चूल्हे की सुगंध मिल रही थी। दाऊद के महल के एक कोने में, एक बूढ़ा व्यक्ति, एलिय्याहीब, अपने पोते योताम के सामने बैठा था। आँगन में अलसाती दीपक की लौ टिमटिमा रही थी, और उसकी छाया दीवार पर नाच रही थी, मानो अतीत के साये उभर रहे हों।

“बेटा,” एलिय्याहीब ने अपनी धीमी, पर गहरी आवाज़ में कहा, उसकी उँगलियाँ एक पुरानी, चमड़े की पोथी पर टिकी थीं। “तुम्हें इन नामों को केवल शब्द नहीं समझना चाहिए। यह सिर्फ वंशावली नहीं है, यह एक नदी है... एक ऐसी नदी जिसका स्रोत स्वयं परमेश्वर की सृष्टि में है। सुनो, इसे कहानी की तरह सुनो।”

योताम ने अपने कंधे से एक चादर ओढ़ी और और करीब सरक गया। दादा की आँखें, झुर्रियों से घिरी, दूर कहीं टिक गईं, मानो समय के पार देख रही हों।

“सबसे पहले, आदम था। उस नाम में ही सारी सुबह की सुगंध, नई मिट्टी की खुशबू और एक ऐसा दर्द समाया है जिसे हम आज भी महसूस करते हैं। उसके बाद शेत आया... वह रेखा, वह आशा, जिस पर मनुष्यता का भविष्य टिका था। और फिर, नाम आते गए – एनोश, कैनान, महललेल, यारेद। क्या तुम सुन सकते हो? यारेद के दिनों में, जब दुनिया अभी जवान थी, पहाड़ और भी ऊँचे लगते होंगे, और नदियाँ और भी गहरी। उसके बाद हनोक आया, वह जो परमेश्वर के साथ चलता था। कल्पना करो, बेटा, एक ऐसा आदमी जिसकी चाल में इतनी निश्चलता थी कि परमेश्वर ने उसे इस संसार से सीधा अपने पास उठा लिया। उसकी गवाही आज भी इन नामों के बीच धड़कती है।”

एलिय्याहीब ने एक गहरी सांस ली। बाहर, एक उल्लू ने पुकारा।

“और फिर मतूशेलह, और लमेक... और फिर नूह। अह, नूह! उसका नाम सुनते ही कानों में जल-प्रलय का कोलाहल सुनाई देने लगता है। उस विशाल जहाज की चरचराहट, उन जानवरों की आवाजें, और फिर चालीस दिन-रात की अंतहीन वर्षा की आवाज। पर उस जलप्रलय के बाद, एक नई शुरुआत हुई। नूह के तीन पुत्र – शेम, हाम और येपेत। इन तीन नामों से ही समस्त नई दुनिया बसी है, जैसे एक विशाल वटवृक्ष की तीन मोटी-मोटी जड़ें।”

उसने पोथी का पन्ना पलटा, चमड़े की सरसराहट शाम की शांति में गूँज उठी।

“पर इनमें से, शेम की रेखा... वही रेखा जिसमें हमारी आशा, हमारा वादा बंधा है। शेम के वंशज, अर्पकशद, शेलह... नाम लगते हैं न साधारण? पर हर नाम एक कड़ी है, एक जीवन है, जिसने अपनी धूप-छाँव देखी। ऐबेर आया, उसके नाम से ही ‘इब्री’ शब्द बना, हम सब का पहचान। और फिर पेलेग, रू, सेरुग, नाहोर... यह सिलसिला चलता रहा, जैसे कोई पथिक लगातार चल रहा हो, एक लक्ष्य की ओर, जिसका अभी पता नहीं था।”

दादा की आवाज़ में एक नया उत्साह आया। “और फिर, तेरह! अब्राम, जिसे हम इब्राहीम के नाम से जानते हैं। देखो, कैसे यह लंबी यात्रा, यह नामों की नदी, अचानक एक ऐसे मोड़ पर मुड़ती है, जहाँ परमेश्वर की प्रतिज्ञा की रोशनी फूटती है। पर उससे पहले, इश्माएल का जन्म हुआ... बारह सरदार। उनके नाम सुनो – नबायोत, कीदार, अद्बेल, मिब्साम... ये सब इश्माएल के पुत्र थे। उनकी अपनी कहानियाँ हैं, उनकी अपनी नस्लें, जो आज के अरब के मरुस्थलों में ऊँटों के पैरों की आहट की तरह फैली हुई हैं।”

“और फिर... फिर इब्राहीम के दूसरे पुत्र, वादे के पुत्र, इसहाक। और इसहाक से एसाव और याकूब। एसाव, जो सेईर के पहाड़ का पिता बना। उसके वंशज – एलीफाज़, रूएल... ये एदोम के सरदार हुए। उनकी अपनी भूमि, अपनी राजनीति, अपने झगड़े। परमेश्वर की नजर में वे भी भुलाए नहीं गए, इसी वंशावली में दर्ज हैं।”

एलिय्याहीब ने आँखें मूंद लीं, मानो थक गया हों, पर उसके चेहरे पर एक गहरी शांति थी। “और याकूब... वही जिसका नाम इस्राएल पड़ा। उसके बारह पुत्र – रूबेन, शिमोन, लेवी, यहूदा... ये नाम तो हमारे दिलों में रच-बस गए हैं। इन्हीं से वे गोत्र बने जिनकी छावनी में हम आज भी रहते हैं। पर याद रखो, यह सिर्फ इतिहास नहीं है। यह एक साक्ष्य है। हर नाम इस बात का गवाह है कि परमेश्वर का वादा, आदम से लेकर इब्राहीम तक, और इब्राहीम से याकूब तक, कभी टूटा नहीं। जीवन की उलझनों, गलतियों, युद्धों और शांति के बीच भी, वह धागा बना रहा। बस, एक लगातार चलने वाला सिलसिला।”

योताम ने देखा, दीपक की लौ अब और धीमी हो गई थी। नामों का यह सैलाब, जो पहले उसे सिर्फ एक उबाऊ सूची लगता था, अब उसके सामने जीवंत मानवों के चेहरों, उनके संघर्षों और आशाओं के साथ नाच रहा था।

“दादा,” उसने धीरे से पूछा, “ये सब याद रखना क्यों ज़रूरी है?”

एलिय्याहीब ने मुस्कुराते हुए उसकी ओर देखा। “क्योंकि, बेटा, जब तू कभी खोया हुआ महसूस करे, जब लगे कि दुनिया में तू बस एक अकेला, अनजान सा पत्ता है, तो ये नाम तुझे याद दिलाएँगे कि तू किसी न किसी रेखा का हिस्सा है। एक ऐसी रेखा जो समय की धूल में कभी खोई नहीं। तू आदम का वंशज है, नूह का उत्तराधिकारी है, और इब्राहीम के वादे का भागी है। यह सिर्फ तेरा अतीत नहीं, तेरी पहचान है। और इस पहचान का स्रोत, स्वयं परमेश्वर है।”

शाम पूरी तरह ढल चुकी थी। दीवार पर छायाएँ लुप्त हो गई थीं। नामों की वह नदी, जो कुछ पल पहले तक कमरे में बह रही थी, अब योताम के मन के भीतर बहने लगी थी – गहरी, रहस्यमयी, और जीवन से भरी हुई। और उसे एहसास हुआ, यह कहानी कभी खत्म नहीं होगी। उसकी अपनी कहानी भी अब इसी नदी का एक हिस्सा थी।

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