2 राजा 8 पुराना नियम

एलीशा और शूनेमी स्त्री की विश्वास की कहानी

**2 राजाओं 8 की कहानी: एलीशा और शूनेमी स्त्री** उन दिनों में जब एलीशा नबी इस्राएल में परमेश्वर...

2 राजा 8 - एलीशा और शूनेमी स्त्री की विश्वास की कहानी

**2 राजाओं 8 की कहानी: एलीशा और शूनेमी स्त्री**

उन दिनों में जब एलीशा नबी इस्राएल में परमेश्वर के वचन का प्रचार कर रहे थे, एक बड़ा अकाल पड़ा था। परमेश्वर ने एलीशा के द्वारा यह कहलवाया था कि सात वर्षों तक भूमि में अन्न नहीं उगेगा। एलीशा ने शूनेम की उस धर्मपरायण स्त्री से, जिसके पुत्र को उन्होंने मृतकों में से जिलाया था, कहा, "उठो, और अपने घरवालों समेत कहीं और चली जाओ, क्योंकि यहोवा ने इस देश में अकाल भेजा है, और यह सात वर्षों तक रहेगा।"

वह स्त्री परमेश्वर के भय से एलीशा की आज्ञा मानकर अपने परिवार के साथ पलिश्तियों के देश में चली गई और सात वर्ष वहाँ निवास करती रही। सात वर्ष पूरे होने पर वह पलिश्तियों के देश से लौटकर अपने घर और अपने खेत को पाने के लिए राजा के पास गई।

उसी समय राजा गहजी से, जो एलीशा का सेवक था, परमेश्वर के उस नबी के सब बड़े कामों के विषय में बातें कर रहा था। जब वह शूनेमी स्त्री के पुत्र को जिलाने की कहानी सुना रहा था, तभी वह स्त्री अपने पुत्र समेत राजा के सामने उपस्थित हुई और अपने घर और भूमि के लिए निवेदन करने लगी।

गहजी ने राजा से कहा, "हे मेरे प्रभु राजा, यह वही स्त्री है और यह उसका पुत्र है, जिसे एलीशा ने जिलाया था।" राजा ने उस स्त्री से पूछा, और उसने सारा वृत्तांत सुनाया। तब राजा ने उसके लिए एक दूत को नियुक्त किया और आज्ञा दी, "इसका सब कुछ, जो उसका था, और उसकी भूमि का सब उपज जो उसके चले जाने के दिन से अब तक हुई है, वह सब उसे लौटा दिया जाए।"

इस प्रकार, परमेश्वर ने उस स्त्री की सुन ली और उसकी सारी संपत्ति उसे वापस मिल गई। यह सब इसलिए हुआ क्योंकि उसने एलीशा के वचन पर विश्वास किया था और परमेश्वर की इच्छा के आगे समर्पण किया था।

**हजाएल का राजा बनना**

उसी समय दमिश्क का राजा बेन्हदद बीमार पड़ा। जब उसे बताया गया कि एलीशा दमिश्क में आया हुआ है, तो उसने अपने दास हजाएल से कहा, "उपहार लेकर परमेश्वर के उस नबी के पास जा और उसके द्वारा यहोवा से पूछ कि क्या मैं इस रोग से अच्छा हो जाऊँगा?"

हजाएल ने चालीस ऊँटों पर दमिश्क के उत्तम उत्तम भेंट लादकर एलीशा के पास पहुँचा और उसके सामने खड़ा होकर कहा, "तेरा पुत्र बेन्हदद, दमिश्क का राजा, ने मुझे तेरे पास यह पूछने को भेजा है कि क्या मैं इस रोग से अच्छा हो जाऊँगा?"

एलीशा ने उससे कहा, "जा, उससे कह, 'तू अवश्य अच्छा हो जाएगा,' परन्तु यहोवा ने मुझे दिखाया है कि वह निश्चय मर जाएगा।" फिर एलीशा हजाएल की ओर देखता रहा, यहाँ तक कि वह लज्जित हो गया। तब परमेश्वर के नबी ने रोना शुरू किया।

हजाएल ने पूछा, "मेरा प्रभु क्यों रो रहा है?"

एलीशा ने उत्तर दिया, "क्योंकि मैं जानता हूँ कि तू इस्राएलियों के विरुद्ध क्या क्या बुराई करेगा। तू उनके गढ़ों को आग लगाएगा, उनके जवानों को तलवार से मार डालेगा, उनके बालकों को पटक पटककर फेंक देगा, और उनकी गर्भवती स्त्रियों का पेट फाड़ डालेगा।"

हजाएल ने कहा, "तेरा दास क्या है, केवल एक कुत्ता, जो इतना बड़ा काम करे?"

एलीशा ने उत्तर दिया, "यहोवा ने मुझे दिखाया है कि तू दमिश्क का राजा होगा।"

तब हजाएल एलीशा के पास से चला गया और अपने स्वामी बेन्हदद के पास लौटकर कहा, "उसने मुझसे कहा कि तू निश्चय अच्छा हो जाएगा।" परन्तु दूसरे दिन हजाएल ने एक मोटा कंबल लेकर पानी में भिगोया और राजा के मुँह पर डाल दिया, जिससे वह मर गया। और हजाएल उसके स्थान पर राजा हो गया।

इस प्रकार, परमेश्वर का वचन पूरा हुआ, जैसा कि एलीशा ने भविष्यद्वाणी की थी। हजाएल ने इस्राएल पर बड़े अत्याचार किए, क्योंकि इस्राएल ने अपने परमेश्वर यहोवा को छोड़कर अन्य देवताओं की उपासना की थी।

**यहूदा का राजा यहोराम**

यहूदा में यहोराम, अहाब के घराने का दामाद, राज्य करता था। वह बत्तीस वर्ष का था जब वह राजा हुआ, और आठ वर्ष तक यरूशलेम में राज्य करता रहा। परन्तु वह इस्राएल के राजाओं के मार्ग पर चला और यहोवा की दृष्टि में बुरा काम करता रहा।

यहोवा ने यहूदा पर क्रोध किया और उन्हें फिलिस्तीनियों और अरबियों के हाथ में कर दिया, जिन्होंने यहोराम के पुत्रों को मार डाला और उसके महलों को लूट लिया। यहोराम के बाद उसका पुत्र अहज्याह राजा हुआ, जो अहाब के घराने की बुराई में चलता रहा।

इस प्रकार, परमेश्वर ने अपने न्याय को पूरा किया, क्योंकि उसके लोगों ने उसकी आज्ञाओं को त्याग दिया था। फिर भी, उसकी दया बनी रही, और उसने अपने वादे के अनुसार दाऊद के वंश को सुरक्षित रखा।

**समापन**

यह कहानी हमें सिखाती है कि परमेश्वर अपने वचन के प्रति सच्चा है। वह उन्हें आशीष देता है जो उसकी आज्ञा मानते हैं, परन्तु जो उसकी अवहेलना करते हैं, उन पर न्याय भी करता है। शूनेमी स्त्री का विश्वास और हजाएल का क्रूर शासन—दोनों ही परमेश्वर की योजना के अंग थे। हमें चाहिए कि हम सदैव परमेश्वर के मार्ग पर चलें और उसकी इच्छा को पूरा करें।

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