बाइबल की कहानी

शिमशोन की रहस्यमय पहेली और फिलिस्तीनियों से बदला

**शिमशोन और उसकी रहस्यमय शादी** उन दिनों में, जब इस्राएल फिलिस्तीनियों के अधीन था, परमेश्वर...

पवित्र बाइबल

**शिमशोन और उसकी रहस्यमय शादी**

उन दिनों में, जब इस्राएल फिलिस्तीनियों के अधीन था, परमेश्वर ने एक विशेष व्यक्ति को चुना—शिमशोन। वह दान के गोत्र से था और उसके माता-पिता बाँझ थे, परन्तु स्वर्गदूत ने उन्हें बताया था कि उनका पुत्र परमेश्वर के लिए नाज़ीर होगा और इस्राएल को फिलिस्तीनियों के हाथ से छुड़ाएगा।

शिमशोन बड़ा हुआ और परमेश्वर का आत्मा उस पर बल से उतरा। एक दिन, वह तिम्ना नगर में गया, जो फिलिस्तीनियों का शहर था। वहाँ उसकी नज़र एक फिलिस्तीनी स्त्री पर पड़ी, जो अत्यंत सुन्दर थी। उसने अपने माता-पिता से कहा, "मैंने तिम्ना में एक स्त्री देखी है, जो फिलिस्तीनी है। उसी से मेरा विवाह करवा दो।"

उसके माता-पिता चिंतित हो गए। "क्या हमारे लोगों में कोई स्त्री नहीं है कि तू अख़्तिरती लोगों में से पत्नी लेना चाहता है?" परन्तु शिमशोन ने ज़ोर देकर कहा, "उसी को मेरे लिए ले आओ, क्योंकि वही मुझे अच्छी लगती है।" उसके माता-पिता नहीं जानते थे कि यह परमेश्वर की योजना थी, क्योंकि वह फिलिस्तीनियों से टकराव का अवसर ढूँढ़ रहा था।

कुछ दिनों बाद, शिमशोन अपने माता-पिता के साथ तिम्ना गया। रास्ते में अंगूरों के बाग़ से गुज़रते हुए, अचानक एक जवान सिंह उस पर गरजता हुआ आया। परन्तु परमेश्वर का आत्मा शिमशोन पर उतरा, और उसने उस सिंह को हाथों ही हाथों फाड़ डाला, जैसे कोई बकरी के बच्चे को फाड़ता है। उसने अपने माता-पिता को यह बात नहीं बताई।

थोड़े समय बाद, वह उस स्त्री से मिलने गया और उसके साथ विवाह करने का निश्चय किया। जब वह वापस लौट रहा था, तो उसने देखा कि उस मरे हुए सिंह के शरीर में मधुमक्खियों ने छत्ता बना लिया है और उसमें मधु भरा हुआ है। उसने अपने हाथों से मधु निकाला और रास्ते में खाता रहा। अपने माता-पिता को भी दिया, परन्तु यह नहीं बताया कि वह मधु सिंह के शव से आया था।

फिर विवाह के अवसर पर, शिमशोन ने वहाँ तीस साथियों को एक दावत दी। उसने उनसे कहा, "मैं तुम्हें एक पहेली सुनाता हूँ। यदि तुम सात दिन के भीतर उसका उत्तर दे दोगे, तो मैं तुम्हें तीस सुंदर वस्त्र और परिधान दूँगा। परन्तु यदि नहीं बता पाए, तो तुम्हें मुझे ऐसा ही देना होगा।"

उसकी पहेली थी— *"खाने वाले में से खाना निकला, और बलवान में से मीठा निकला।"*

तीन दिन तक फिलिस्तीनी सोचते रहे, पर उत्तर न पा सके। अंत में, उन्होंने शिमशोन की पत्नी से कहा, "तू अपने पति को मना कर हमारे लिए पहेली का अर्थ पूछ, नहीं तो हम तुझे और तेरे पिता के घर को आग लगा देंगे!"

डर के मारे, उस स्त्री ने शिमशोन से रो-रोकर कहा, "तुम मुझसे प्रेम नहीं करते, वरना पहेली का अर्थ मुझे बता देते!" शिमशोन ने कहा, "मैंने अपने माता-पिता को भी नहीं बताया, तो तुझे क्यों बताऊँ?" परन्तु वह स्त्री सात दिन तक उस पर रोती रही। अंत में, थककर शिमशोन ने उसे बता दिया कि उसने सिंह को मारा था और उसमें से मधु पाया था।

तुरन्त उस स्त्री ने फिलिस्तीनियों को उत्तर बता दिया। सातवें दिन, सूर्यास्त से पहले, वे शिमशोन के पास आए और बोले— *"हमें उत्तर मिल गया! मीठा शहद सिंह से निकला, और खाने वाला सिंह था!"*

शिमशोन समझ गया कि उसकी पत्नी ने उसे धोखा दिया है। क्रोध में उसने कहा, *"यदि तुमने मेरी बछिया से हल नहीं जोता होता, तो तुम मेरी पहेली का उत्तर नहीं पा सकते थे!"*

परमेश्वर का आत्मा फिर उस पर उतरा, और वह अश्कलोन नगर गया। वहाँ उसने तीस फिलिस्तीनियों को मार डाला, उनके वस्त्र लूटकर अपने साथियों को दे दिए। फिर वह क्रोधित होकर अपने पिता के घर चला गया, और उसकी पत्नी उसके एक साथी को दे दी गई।

इस प्रकार, शिमशोन के जीवन की यह घटना परमेश्वर की योजना का हिस्सा थी, क्योंकि वह फिलिस्तीनियों से बदला लेने के लिए अवसर ढूँढ़ रहा था। शिमशोन की यह कहानी हमें सिखाती है कि परमेश्वर अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए विभिन्न परिस्थितियों का उपयोग करता है, चाहे वे कितनी भी अजीब क्यों न लगें।