**राजा नबूकदनेस्सर का सपना और उसका दण्ड**
राजा नबूकदनेस्सर बेबीलोन का महान शासक था, जिसका राज्य विशाल और अजेय था। उसकी शक्ति और वैभव के आगे सारे संसार के राजा झुकते थे। परन्तु उसके हृदय में अभिमान बढ़ता गया, और वह यह भूल गया कि उसकी सारी महिमा और सामर्थ्य स्वर्ग के परमेश्वर की देन है।
एक रात, राजा ने एक अद्भुत और भयावह सपना देखा। उसकी नींद उचट गई, और उसका मन व्याकुल हो उठा। उसने अपने दरबार के ज्योतिषियों, तांत्रिकों और बुद्धिमानों को बुलवाया और कहा, "मैंने एक सपना देखा है जिसने मेरे मन को विचलित कर दिया है। मैं उसका अर्थ जानना चाहता हूँ।" परन्तु जब उन्होंने राजा से सपना सुनाने को कहा, तो वे उसका अर्थ न बता सके।
तब दानिय्येल, जिसका नाम बेलशस्सर रखा गया था और जो परमेश्वर की ओर से बुद्धि प्राप्त था, राजा के सामने उपस्थित हुआ। राजा ने उससे कहा, "हे बेलशस्सर, मैं जानता हूँ कि तुझ में पवित्र देवताओं की आत्मा है, और कोई भी रहस्य तेरे लिए छिपा नहीं है। मेरे सपने का अर्थ मुझे बता।"
दानिय्येल कुछ देर तक चुप रहा, क्योंकि सपने का अर्थ सुनकर वह भयभीत हो गया। अन्त में उसने कहा, "हे राजा, यह सपना तेरे शत्रुओं के लिए नहीं, बल्कि तेरे लिए ही है। परमेश्वर ने तुझे दिखाया है कि तेरे बाद क्या होने वाला है।"
दानिय्येल ने आगे बताया, "हे राजा, तूने देखा कि एक विशाल वृक्ष पृथ्वी के बीच में खड़ा था, जिसकी ऊँचाई आकाश तक पहुँचती थी। उसकी छाया सारी पृथ्वी पर फैली थी, और उसके फल इतने अधिक थे कि सब जीव-जन्तु उससे भोजन पाते थे। फिर एक स्वर्गदूत आकर उस वृक्ष को काट डालने की आज्ञा देता है, परन्तु उसकी जड़ को पृथ्वी में छोड़ दिया जाता है। उसे जंगली पशुओं के साथ रहना होगा, और उसका मनुष्य का हृदय बदलकर पशु का हृदय दे दिया जाएगा। यह तब तक रहेगा जब तक वह यह न जान ले कि परमप्रधान परमेश्वर ही मनुष्यों के राज्यों पर अधिकार रखता है और जिसे चाहे, उसे दे देता है।"
दानिय्येल ने राजा से विनती करते हुए कहा, "हे राजा, मेरी सलाह मान और पापों को धो डाल, और दीन-हीन लोगों पर दया कर। शायद तेरी शान्ति बढ़ जाए।"
परन्तु बारह महीने बीत जाने के बाद, राजा अपने महल की छत पर टहल रहा था और उसने कहा, "क्या यह महान बेबीलोन नहीं है, जिसे मैंने अपनी ही सामर्थ्य से बनाया है, अपने ही पराक्रम के लिए राजसिंहासन की महिमा दी है?" उसके मुख से यह बात निकलते ही स्वर्ग से एक आवाज़ आई, "हे राजा नबूकदनेस्सर, तेरा राज्य तुझ से ले लिया गया है। तू मनुष्यों के बीच से निकाल दिया जाएगा और तेरा निवास जंगली पशुओं के साथ होगा। तुझे घास खानी पड़ेगी, और सात काल तक ऐसा ही रहेगा, जब तक तू यह न जान ले कि परमप्रधान परमेश्वर ही मनुष्यों के राज्यों पर अधिकार रखता है।"
उसी घड़ी वह बात पूरी हुई। नबूकदनेस्सर मनुष्यों के बीच से निकाल दिया गया और उसने जंगली पशुओं के साथ घास खाई। उसके बाल उकाब पक्षी के पंखों के समान और नाखून पक्षी के पंजों के समान बढ़ गए।
सात काल बीत जाने के बाद, राजा ने अपनी आँखें स्वर्ग की ओर उठाईं और उसका बुद्धि लौट आई। उसने परमप्रधान परमेश्वर की स्तुति की और कहा, "अब मैं उसकी प्रशंसा और महिमा करता हूँ, क्योंकि उसका राज्य सदा का है और उसकी सामर्थ्य पीढ़ी-दर-पीढ़ी बनी रहती है। पृथ्वी के सारे निवासी उसके सामने कुछ नहीं हैं। वह जैसा चाहता है, सेना आकाश और पृथ्वी के साथ करता है। कोई उसके हाथ को नहीं रोक सकता और न उससे पूछ सकता है, 'तू क्या करता है?'"
तब राजा का राज्य उसे फिर से मिल गया, और उसकी महिमा पहले से भी अधिक बढ़ गई। उसने सारे संसार में यह घोषणा करवाई कि सर्वोच्च परमेश्वर की स्तुति हो, जिसके काम सत्य और मार्ग न्याय के हैं। वह उन्हें गिरा सकता है जो अभिमान से चलते हैं, और जो दीन हैं, उन्हें ऊँचा उठा सकता है।
इस प्रकार, राजा नबूकदनेस्सर ने स्वीकार किया कि स्वर्ग का परमेश्वर ही सच्चा शासक है, और उसकी आज्ञा के बिना कोई भी सिंहासन पर नहीं बैठ सकता। उसकी कहानी हमें सिखाती है कि अभिमान मनुष्य का पतन करता है, परन्तु विनम्रता परमेश्वर की दृष्टि में बहुमूल्य है।
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