**यीशु और सामरिया की स्त्री: जीवन का जल**
गर्मी की दोपहर थी। सूरज आकाश में चमक रहा था, और धरती गर्मी से तप रही थी। यीशु और उसके चेले यहूदिया से गलील की ओर यात्रा कर रहे थे। रास्ते में सामरिया का छोटा-सा गाँव सुखार पड़ता था। थकान से चूर, यीशु वहाँ याकूब के कुएँ के पास बैठ गए। उस समय लगभग छठा पहर (दोपहर का समय) था। चेले खाना खरीदने के लिए नज़दीक के गाँव में गए हुए थे।
कुएँ के पास एक स्त्री पानी भरने आई। वह सामरिया की थी। उसका चेहरा थकान और शर्मिंदगी से झुका हुआ था। वह जानबूझकर उस समय आई थी जब औरतें पानी भरने नहीं आती थीं, ताकि किसी के सामने न पड़े। उसने यीशु की ओर देखा, लेकिन उससे बात नहीं की, क्योंकि यहूदी और सामरियों के बीच कोई बातचीत नहीं होती थी।
तभी यीशु ने उससे कहा, **"मुझे पानी पिला।"**
स्त्री चौंक गई। उसने यीशु की ओर देखा और कहा, **"तुम यहूदी हो, मैं सामरिया की स्त्री हूँ, फिर तुम मुझसे पानी कैसे माँगते हो?"**
यीशु ने उत्तर दिया, **"अगर तू परमेश्वर के दान को जानती, और जो तुझसे कहता है कि 'मुझे पानी पिला,' वह कौन है, तो तू उससे माँगती, और वह तुझे जीवन का जल देता।"**
स्त्री ने आश्चर्य से पूछा, **"हे प्रभु, तुम्हारे पास तो पानी भरने को बर्तन भी नहीं है, और यह कुआँ गहरा है। फिर तुम वह जीवन का जल कहाँ से लाओगे? क्या तुम हमारे पूर्वज याकूब से भी बड़े हो, जिसने हमें यह कुआँ दिया? उसने स्वयं यहाँ से पानी पिया था, और उसके बच्चों और उसके पशुओं ने भी।"**
यीशु ने गंभीरता से कहा, **"जो कोई यह जल पीता है, वह फिर प्यासा होगा। परन्तु जो कोई वह जल पीएगा जो मैं उसे दूँगा, वह फिर कभी प्यासा न होगा। बल्कि, जो जल मैं उसे दूँगा, वह उसमें एक सोता बन जाएगा, जो अनन्त जीवन के लिए उमड़ता रहेगा।"**
स्त्री ने उत्सुकता से कहा, **"हे प्रभु, वह जल मुझे दे दो, ताकि मुझे फिर प्यास न लगे और मुझे यहाँ पानी भरने न आना पड़े।"**
यीशु ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, **"जा, अपने पति को बुला ला और यहाँ आ।"**
स्त्री ने झिझकते हुए कहा, **"मेरा कोई पति नहीं है।"**
यीशु ने मुस्कुराते हुए कहा, **"तू ने ठीक कहा कि तेरा कोई पति नहीं है। तूने पाँच पुरुषों के साथ रहा है, और अब जिसके साथ तू रहती है, वह तेरा पति नहीं है। तू ने सच कहा है।"**
स्त्री स्तब्ध रह गई। उसने महसूस किया कि यह कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। उसने कहा, **"हे प्रभु, मैं देखती हूँ कि तुम एक भविष्यद्वक्ता हो। हमारे पूर्वज इसी पहाड़ पर पूजा करते थे, पर तुम यहूदी कहते हो कि पूजा करने की जगह यरूशलेम में है।"**
यीशु ने उत्तर दिया, **"स्त्री, मेरी बात पर विश्वास कर। वह समय आता है जब तुम न तो इस पहाड़ पर और न यरूशलेम में पिता की उपासना करोगे। तुम जिसे नहीं जानते, उसकी उपासना करते हो; हम जिसे जानते हैं, उसकी उपासना करते हैं, क्योंकि उद्धार यहूदियों से है। परन्तु वह समय आता है, बल्कि अब है, जब सच्चे उपासक पिता की आत्मा और सच्चाई से उपासना करेंगे, क्योंकि पिता ऐसे ही उपासकों को ढूँढ़ता है। परमेश्वर आत्मा है, और उसकी उपासना करने वालों को आत्मा और सच्चाई से उपासना करनी चाहिए।"**
स्त्री ने कहा, **"मैं जानती हूँ कि मसीह (जिसे मसीहा कहते हैं) आने वाला है। जब वह आएगा, तो हमें सब कुछ बता देगा।"**
यीशु ने उससे कहा, **"जो तुझसे बात कर रहा हूँ, वही हूँ।"**
उसी समय उसके चेले लौट आए और देखकर आश्चर्यचकित हुए कि वह एक सामरिया स्त्री से बात कर रहा है, पर किसी ने कुछ नहीं पूछा। स्त्री ने अपना घड़ा छोड़ दिया और गाँव में जाकर लोगों से कहा, **"आओ, एक मनुष्य को देखो जिसने मेरे सब कर्म बता दिए। क्या यह मसीह हो सकता है?"**
लोग उसकी बात सुनकर कुएँ की ओर चल पड़े। इस बीच चेलों ने यीशु से खाने के लिए कहा, पर उसने उत्तर दिया, **"मेरे पास एक भोजन है जो तुम नहीं जानते।"**
चेले आपस में कहने लगे, **"क्या किसी ने उसे खाने को दिया है?"**
यीशु ने समझाया, **"मेरा भोजन यह है कि मैं अपने भेजने वाले की इच्छा पूरी करूँ और उसका काम पूरा करूँ। क्या तुम नहीं कहते कि कटनी में अभी चार महीने हैं? मैं तुमसे कहता हूँ, अपनी आँखें उठाकर खेतों को देखो, वे कटने के लिए पक चुके हैं।"**
इतने में सामरिया के बहुत से लोग उस स्त्री के कहने पर यीशु पर विश्वास करके आए। उन्होंने यीशु से विनती की कि वह उनके साथ रुके। वह वहाँ दो दिन रहा और बहुतों ने उसके वचन सुनकर विश्वास किया। वे उस स्त्री से कहने लगे, **"अब हम तेरे कहने से नहीं, परन्तु स्वयं सुनकर विश्वास करते हैं, क्योंकि हम जानते हैं कि यही सचमुच जगत का उद्धारकर्ता है।"**
और इस तरह, एक ऐसी स्त्री जिसे समाज ने तुच्छ समझा था, वही यीशु के प्रकाश को फैलाने का साधन बन गई। उसके जीवन में जीवन का जल बह निकला, और उसके गाँव के अनेक लोगों ने उद्धार पाया। यीशु ने दिखा दिया कि वह सभी को प्यार करता है—चाहे वे समाज के किसी भी कोने से हों।