**भजन संहिता 10 पर आधारित कहानी: "अंधकार में प्रकाश"**
एक समय की बात है, यरूशलेम के पास एक छोटे से गाँव में एक धर्मपरायण व्यक्ति रहता था, जिसका नाम एलियाह था। वह प्रभु पर पूर्ण विश्वास रखता था और हर दिन उसकी स्तुति में समय बिताता था। लेकिन उसके गाँव में ही एक दुष्ट व्यक्ति भी रहता था, जिसका नाम रहाब था। रहाब अहंकारी, लालची और निर्दयी था। वह कमजोरों का शोषण करता, गरीबों को धोखा देता और अपनी शक्ति के बल पर निरपराधों को सताता था।
एक दिन, एलियाह ने देखा कि रहाब ने एक अनाथ विधवा और उसके बच्चे से उनकी छोटी-सी जमीन छीन ली थी। विधवा रोती हुई एलियाह के पास आई और बोली, "भाई, मेरे पास और कोई सहारा नहीं है। यह दुष्ट मेरे पति की मृत्यु के बाद से ही मुझे सताता आ रहा है। अब उसने मेरी जमीन भी छीन ली है। प्रभु कहाँ है? क्या वह मेरी पुकार नहीं सुनता?"
एलियाह ने उसे धीरज बँधाया और कहा, "बहन, डरो मत। प्रभु सब कुछ देख रहा है। वह कभी भी न्याय से अपनी आँखें नहीं मोड़ता।" लेकिन उसके मन में भी प्रश्न उठा, जैसा कि भजन संहिता 10:1 में लिखा है—**"हे यहोवा, तू क्यों दूर खड़ा रहता है? संकट के समय क्यों अपने को छिपा लेता है?"**
उधर, रहाब अपनी सफलता पर इतराता हुआ गाँव में घूमता था। वह सोचता था कि उसके पैसे और ताकत के आगे कोई उसे कुछ नहीं बोल सकता। उसने अपने मन में कहा, जैसे भजन 10:4 में वर्णित है—**"दुष्ट अपने घमंड में कहता है, 'वह सजा नहीं देगा। कोई परमेश्वर नहीं है।'"** वह निरंतर पाप करता गया, मानो उसके कर्मों का कोई परिणाम नहीं होगा।
कुछ दिनों बाद, गाँव में एक भयंकर अकाल पड़ा। खेत सूख गए, नदियाँ सूखने लगीं, और लोग भूख से तड़पने लगे। रहाब ने इस संकट का फायदा उठाकर अनाज के दाम आसमान छूने दिए। गरीबों की कराहट बढ़ती गई, लेकिन रहाब के हृदय में कोई दया नहीं थी। एलियाह ने प्रार्थना की, **"हे प्रभु, उठ! हे परमेश्वर, अपना हाथ बढ़ा! कमजोरों को मत भूल!"** (भजन 10:12)
तभी एक रात, आकाश में काले बादल छा गए और भयानक गर्जन के साथ मूसलाधार बारिश होने लगी। लोगों ने इसे प्रभु की कृपा समझा, लेकिन रहाब के लिए यह विनाश लेकर आई। उसका विशाल अनाज का भंडार, जिसे उसने अन्याय से इकट्ठा किया था, बाढ़ के पानी में बह गया। उसका महलनुमा घर तेज हवाओं से धराशायी हो गया। रहाब भागता हुआ एक पहाड़ी पर चढ़ा, लेकिन वहाँ एक जंगली जानवर ने उस पर हमला कर दिया।
अगली सुबह, गाँव वालों ने रहाब का शव देखा। उसका अहंकार, उसकी दुष्टता, सब उसी के साथ समाप्त हो गई। एलियाह ने विधवा और अन्य लोगों को इकट्ठा किया और कहा, **"प्रभु ने सुनी हमारी पुकार। दुष्ट का अंत हो गया, लेकिन परमेश्वर के शरणागतों को वह कभी नहीं छोड़ता।"** (भजन 10:16-18)
धीरे-धीरे गाँव में शांति लौटी। अनाज के भंडार खुले, और गरीबों को न्याय मिला। एलियाह ने सबको याद दिलाया, **"यहोवा राजा है युगानुयुग। दुष्ट राष्ट्र उसकी भूमि से नाश हो जाएँगे। प्रभु दीनों की इच्छा सुनता है, उनके मन की तैयारी करता है, और उनकी सुनकर उनकी सहायता करता है।"**
और इस तरह, प्रभु की धर्मी व्यवस्था सिद्ध हुई, जैसा कि भजन संहिता 10 में वर्णित है। दुष्ट का अंत हुआ, और नम्र लोगों को सुरक्षा मिली। सभी ने महसूस किया कि **"यहोवा सदैव राज्य करता है, और उसकी न्यायपूर्ण सत्ता कभी समाप्त नहीं होती।"**
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